तहलका के तरुण तेजपाल और कपिल सिब्बल -2
इन परिस्थितियों में पीड़िता व उसके परिवार के जीवन को ऐसे उच्च पदस्थ अपराधी से सम्भावित संकट से सुरक्षा का प्रश्न भी युग दर्पण ने उठाया था ।
उत्तरी गोवा जिला और सत्र न्यायालय में उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर दोपहर हुई सुनवाई में व्यापक चर्चा के पश्चात उत्तरी गोवा जिला और सत्र न्यायाधीश अनुजा प्रभु देसाई द्वारा तरुण तेजपाल की माँग अस्वीकृत होने पर अन्तत: बंदी बना लिया गया। अब व्यापक जाँच तथा न्यायालय में बलात्कार का गम्भीर आरोप झेल रहे तेजपाल का मामला प्रमाणित होने के बाद आजीवन कारावास का दंड मिल सकता है। नए कानून के अनुसार ऐसे अपराधी को अपना शेष जीवन कारावास में बिताना होगा।
इस प्रकार का कठोर दंड मिलना तो आवश्यक है किन्तु साथ ही समाज में हो रहे, नैतिक मूल्यों के ह्रास को रोकना तथा नैतिक शिक्षा की आवश्यकता को भी समझना व उसे लागु करना होगा।
सिब्बल ने 'संडे एक्सप्रेस' से बातचीत में कहा, '2003 में जब तेजपाल तहलका पत्रिका शुरू करने वाले थे तो उन्होंने मुझसे सहायता मांगी थी और मैंने 5 लाख रुपये दान में दिया था। इसके बदले न तो मैंने कभी शेयर की मांग की और न ही कभी अलॉटमेंट लेटर आया।' सिब्बल जी, क्या आपने यह सहायता अपने विरोधियों पर कीचड़ उछालने में इसका उपयोग करने हेतु नहीं दी ? क्या, तहलका को आप अपने विरोधियों के विरुद्ध हथियार के रूप में उपयोग नहीं करते रहे ?
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