| सुरक्षा पेटी 'सीट बैल्ट' का उपयोग श्री गोपीनाथ मुंडे के प्राण बचा सकता था स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के अनुसार कर में सुरक्षा पेटी का उपयोग श्री गोपीनाथ मुंडे के प्राण बचा सकता था। डॉ. हर्षवर्धन ने दिवंगत ग्रामीण विकास मंत्री की अंत्येष्टि में सम्मिलित होने के लिए बीड, महाराष्ट्र प्रस्थान करने से पूर्व कहा ‘अधिकांश लोग मानते हैं कि कार में पिछली सीट पर लगाई गयी पेटी, केवल सजावट के उद्देश्य से लगाई जाती है। मैंने मात्र इस एक भ्रांन्ति के चलते अपना मित्र खो दिया है। वास्तव में अगली सीटों की पेटी की भांति पिछली सीट पर पेटी लगाना भी अनिवार्य होता है। किसी अप्रिय स्थिति में यह जीवन बचाने का कारण हो सकती है।’
मंगलवार को श्री गोपीनाथ मुंडे का निधन एक दुर्घटना के कारण हो गया था। लाल बत्ती को पार कर एक कार ने श्री मुंडे की कार को टक्कर मार दी थी। इस दुर्घटना से उनकी कार को तो अधिक क्षति नहीं पहुंची, किन्तु कार को लगे तेज धक्के के कारण श्री मुंडे की गर्दन के जोड़ और उनकी रीढ़ की हड्डी को गंभीर चोट पहुंची, जिसके कारण मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति बाधित हुई और तत्काल उनकी हृदय गति और सांस रुक गयी। इसके अतिरिक्त उनका यकृत (जिगर) भी फट गया था और इसमें से रक्त बह रहा था। देश ने एक महत्वपूर्ण जननेता और समर्थ मंत्री खो दिया है।
अगस्त, 1997 में ऐसी ही एक दुर्घटना में ब्रिटेन की प्रिंसेस डायना के प्राण चले गए। उनकी द्रुतगति कार पेरिस में एक भूमिगत सुरंग में खम्भे से टकरा गई थी। 2007 में ऐसी ही एक दुर्घटना में, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा की कार की ट्रक से हुई टक्कर के कारण निधन हो गया था। आज मैं उन अनेक लोगों के दु:ख को अनुभव कर पा रहा हूं जो सुरक्षा पेटी की आवश्यकता को अस्वीकरण से कार दुर्घटना में अपने प्रिय जनों को खो देते हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय का अभियान
डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय गाड़ी चलाते समय सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले लोगों को, जागृत करने की पहल करेगा।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सुरक्षा के बारे में स्वयं सेवी संगठनों के सहयोग से मल्टी मीडिया अभियान चलाने पर विचार किया जा रहा है। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा ‘’ मुख्य ध्यान प्रत्यक्ष रूप से दुर्घटना के शिकार अथवा उन बच्चों पर दिया जायेगा, जिन्हें अभिभावक पिछली सीट पर बैठाते है अथवा जिनकी पर्याप्त देखभाल नहीं की जाती। बच्चे गलत लोगों का अनुकरण भी कर सकते हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि गलत ढ़ग से अथवा अंधाधुंध गाड़ी चलाने वाले लोगों का अनुकरण करने की बजाय बच्चों को सही ढ़ग से जीवन जीना सिखाना चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यह चिंता की बात है कि विश्व के अन्य देशों की तुलना में भारत में युवा वर्ग आजकल सुरक्षा पेटी और सुरक्षा टोपी (मोटरबाइक चलाते समय) लगाने में रूचि नहीं लेते। अनुसंधान से पता चला है कि विशेषकर महिला चालकों और मोटरसाइकिल चालकों, विशेषकर से पिछली सीट पर बैठी महिलाओं में यह रूझान बहुत अधिक देखा गया है।
डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, ‘’ मैं कार और बाइक चालकों को सुरक्षा के बारे में जागरूक करने के लिए देशभर में पैट्रोल डीलर एसोसियशन का सहयोग चाहता हूं। डॉ. हर्षवर्धन ने जनता से अपील करते हुए कहा, ‘’ आइये गोपीनाथ मुंडे की त्रासदी को क्रांतिकारी परिवर्तन के रूप में लें।‘’
उन्होंने कहा, ‘’मंत्री जी की त्रासदी और असमय मृत्यु को सभी वाहन चालकों को चेतावनी के रूप में लेना चाहिए। एक जीवन बचाना, एक जीवन बनाने के समान है और समाज में संभावित परिवर्तन लाने वाला ही भविष्य को सुरक्षित कर सकता है।‘’नकारात्मक मीडिया के सकारात्मक व्यापक विकल्प का सार्थक संकल्प -युगदर्पण मीडिया समूह YDMS- तिलक संपादक |
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Wednesday, June 4, 2014
स्वास्थ्य मंत्री का जीवन सुरक्षा अभियान
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