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Wednesday, December 23, 2015

कंधमाल दंगों पर न्यायमूर्ति नायडू आयोग की रपट

कंधमाल दंगों पर न्यायमूर्ति नायडू आयोग की रपट 
तिलक  
22 दिसं 15 
कंधमाल दंगा मामले में 25 बरी प्राप्त जानकारी के अनुसार ओडिशा के कंधमाल जिले में सात वर्ष पूर्व 2008 में हुए सांप्रदायिक दंगे की जांच कर रहे न्यायमूर्ति ए.एस. नायडू आयोग ने आज दो खंडों में अपनी रपट गृहसचिव राज्य सरकार को सौंप दी। आयोग के सचिव ए.के. पटनायक के अनुसार आयोग के समक्ष कुल 825 लिखित वक्तव्य प्रस्तुत किए गए। आयोग ने 300 गवाहों के वक्तव्य अंकित किए । उन्होंने कहाकि आयोग ने जाँच के मध्य 4000 पृष्ठ के प्रपत्र जाँचे किन्तु यह नहीं बताया कि आयोग ने कंधमाल दंगे पर अपनी जांच रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष निकाले हैं और कौन-कौन सी अनुशंसाएं की हैं। 
उल्लेखनीय है कि ओडिशा सरकार ने कंधमाल जिले और राज्य के अन्य भागों में सांप्रदायिक दंगे भड़कने के बाद 8 सितंबर 2008 को न्यायिक आयोग का गठन किया था। 23 अगस्त की रात में चकापाड़ा आश्रम में विश्व हिंदू परिषद के नेता स्वामी लक्ष्मणांद सरस्वती और उनके चार सहयोगियों की हत्या के बाद, जलेसपाटा आश्रम से चकापाडा आश्रम तक की सरस्वती स्वामी की अंत्येष्टि यात्रा के मध्य ये दंगे भड़के थे। इन दंगों में कंधमाल और उससे लगे क्षेत्रों में 38 से अधिक लोगों की मौत हो गई। एक प्राथमिकी पर कार्यवाही करते हुए दारिंगबड़ी थाना पुलिस ने जिन सुमंत डिगाल व 24 अन्य को दंगा और आगजनी के आरोप में बंदी बनाया था, उनके विरुद्ध कोई साक्ष्य नहीं होने से स्थानीय अदालत ने उन्हें मुक्त कर दिया। 
जिसके बाद सरस्वती स्वामी और उनके सहयोगियों की हत्या के लिए दोषी माने गए 25,000 से अधिक ईसाई घर छोड़ कर भागने पर बाध्य हुए। जबकि, पुलिस ने इन हत्याओं का आरोप माओवादियों पर लगाया। 
Image result for कंधमाल दंगे 15 जुलाई को पाणिग्रही आयोग ने कंधमाल में ईसाई तत्वों द्वारा किए गए साम्प्रदायिक दंगे की जांच के अन्तर्गत पहली सुनवाई की। न्यायमूर्ति बासुदेव पाणिग्रही आयोग ने फूलबनी स्थित जिला मुख्यालय में अलग-अलग लोगों के वक्तव्य अंकित किए और दिसम्बर 2008 में कंधमाल में हुई हिंसा, जिसमें दो लोगों की मौत हुई थी, की बाकायदा जांच प्रारंभ की। इस चार दिवसीय सुनवाई के बीच दंगे से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र बाराखम्मा और बालीगुड़ा के लोगों ने अपने वक्तव्य दर्ज करवाए। 
 उल्लेखनीय है कि सरकार ने पाणिग्रही आयोग से आगामी अगस्त तक अपनी रपट प्रस्तुत करने को कहा था। जबकि न्यायमूर्ति पाणिग्रही ने कहा है कि यह समय पर्याप्त नहीं है। उन्हें इस संबंध में 470 लोगों के शपथ पत्र प्राप्त हुए हैं, जिनकी सुनवाई में कम से कम छह महीने का समय लगेगा। जांच आयोग ने दंगा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करके स्थानीय लोगों से चर्चा भी की है। उल्लेखनीय है कि कंधमाल दंगे में राज्य सरकार के एक कैबिनेट मंत्री पदमानव बेरेरा (जो कंधमाल जिले से हैं) को त्यागपत्र देना पड़ा था। उस दंगे में कई धार्मिक स्थलों को अपराधी तत्वों ने क्षति पहुंचाई थी। 
न्यायमूर्ति सरत चंद्र महापात्र के नेतृत्व में सरस्वती स्वामी की हत्या और उसके बाद हुए दंगों की जांच के लिए एक सदस्यीय आयोग का गठन किया गया। जांच पूर्ण होने से पूर्व न्यायमूर्ति महापात्र का निधन 2012 में हो गया। इसके बाद, 2012 में राज्य सरकार ने न्यायमूर्ति ए.एस. नायडू की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग नियुक्त किया गया। 
नकारात्मक मीडिया के सकारात्मक व्यापक विकल्प का सार्थक संकल्प
-युगदर्पण मीडिया समूह YDMS- तिलक संपादक

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