कंधमाल दंगों पर न्यायमूर्ति नायडू आयोग की रपट
तिलक
22 दिसं 15
22 दिसं 15
उल्लेखनीय है कि ओडिशा सरकार ने कंधमाल जिले और राज्य के अन्य भागों में सांप्रदायिक दंगे भड़कने के बाद 8 सितंबर 2008 को न्यायिक आयोग का गठन किया था। 23 अगस्त की रात में चकापाड़ा आश्रम में विश्व हिंदू परिषद के नेता स्वामी लक्ष्मणांद सरस्वती और उनके चार सहयोगियों की हत्या के बाद, जलेसपाटा आश्रम से चकापाडा आश्रम तक की सरस्वती स्वामी की अंत्येष्टि यात्रा के मध्य ये दंगे भड़के थे। इन दंगों में कंधमाल और उससे लगे क्षेत्रों में 38 से अधिक लोगों की मौत हो गई। एक प्राथमिकी पर कार्यवाही करते हुए दारिंगबड़ी थाना पुलिस ने जिन सुमंत डिगाल व 24 अन्य को दंगा और आगजनी के आरोप में बंदी बनाया था, उनके विरुद्ध कोई साक्ष्य नहीं होने से स्थानीय अदालत ने उन्हें मुक्त कर दिया।
जिसके बाद सरस्वती स्वामी और उनके सहयोगियों की हत्या के लिए दोषी माने गए 25,000 से अधिक ईसाई घर छोड़ कर भागने पर बाध्य हुए। जबकि, पुलिस ने इन हत्याओं का आरोप माओवादियों पर लगाया।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने पाणिग्रही आयोग से आगामी अगस्त तक अपनी रपट प्रस्तुत करने को कहा था। जबकि न्यायमूर्ति पाणिग्रही ने कहा है कि यह समय पर्याप्त नहीं है। उन्हें इस संबंध में 470 लोगों के शपथ पत्र प्राप्त हुए हैं, जिनकी सुनवाई में कम से कम छह महीने का समय लगेगा। जांच आयोग ने दंगा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करके स्थानीय लोगों से चर्चा भी की है। उल्लेखनीय है कि कंधमाल दंगे में राज्य सरकार के एक कैबिनेट मंत्री पदमानव बेरेरा (जो कंधमाल जिले से हैं) को त्यागपत्र देना पड़ा था। उस दंगे में कई धार्मिक स्थलों को अपराधी तत्वों ने क्षति पहुंचाई थी। नकारात्मक मीडिया के सकारात्मक व्यापक विकल्प का सार्थक संकल्प
-युगदर्पण मीडिया समूह YDMS- तिलक संपादक
No comments:
Post a Comment